उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिध मंडल नोएडा ईकाई द्वारा जीएसटी बिल के कानूनों के खिलाफ जिलाधिकारी कैंप कार्यालय पर सिटी मजिस्ट्रेट श्री बच्चू सिंह को वित्तमंत्री के नाम ज्ञापन दिया !

नोएडा।15-7-2016। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिध मंडल नोएडा ईकाई द्वारा केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित जीएसटी बिल के कानूनों के खिलाफ जिलाधिकारी कैंप कार्यालय पर सिटी मजिस्ट्रेट श्री बच्चू सिंह को वित्तमंत्री श्री अरूण जेटली के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इससे पहले डीएम कैंप कार्यालय पर नोएडा के सैंकड़ों व्यापारी जमा हुए और जीएसटी कानूनों के खिलाफ नारे बाजी कर विरोध जताया। एक मौके पर व्यापारियों ने व्यापारी को अपराधी बनाने वाले कानून को समाप्त किये जाने की मांग की उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रांतीय कोषाध्यक्ष एव जिलाध्यक्ष नरेश कुच्छल ने बताया कि यदि इन कानूनों को नहीं हटाया जाता तो व्यापारी व्यापारी न होकर केवल गुनहार रहेगा। इस मौके पर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के चेयरमैन अशोक चौहान, राम अवतार सिंह, मूलचंद्र गुप्ता, राकेश गुप्ता, दिनेश महावर, सुशील मित्तल, राज कुमार गोयल, दीपक राजवंशी सहित सैकड़ो व्यापारी मौजूद थे।  इन नियमों का है विरोध 1.जीएसटी के प्रारूप में विभाग के इंस्पेक्टरों को असीमित अधिकार दिए गए है। कोई भी इंस्पेक्टर किसी भी व्यापारी को छोटी मोटी गलतियों पर गिरफ्तार कर सकता है। ऐसे प्रावधानों में इंस्पेक्टर राज और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। अत: गिरफ्तारी के प्रावधानों को समाप्त किया जाए।  2. जीएसटी के कानूनों में व्यापारियों पर विभिन्न धाराओं में 5 हजार से 25 हजार तक कई प्रकार के जुर्माने का अधिकार जीएसटी अधिकरी को दिया गया है। प्रतितिदन जुर्माना लगाने की व्यवस्था कष्ठकारक है। अत: दैनिक जुर्माने की व्यवस्था समाप्त की जाए।  3. जीएसटी वह सीजीएसटी की विभिन्न धाराओं में 6 महीने, 12 महीने एवम 5 साल की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है तथा इसे गैर जमानती अपराध बनाया गया है। जो की अनुचित है अत: जेल भेजनी वाली धारा को जीएसटी से पूर्णतया सामप्त की जाए।  4. जीएसटी में जांच के समय अधिकारी को किसी भी अलमारी, बाक्स या परिसर का ताला तोडकऱ जांच करने व सील करने का अधिकार होगा। कमिश्नर यदि आवश्यक समझेंगे तो व्यापारी को गिरफ्तार करने के आदेश दे सकते हैं। गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा। इस देश का व्यापारी, व्यापारी ने होकर जीएसटी की नजरों में गुनाहगार बना रहेगा। यह प्रावधान पूर्णतया समाप्त किया जाए।  5. जीएसटी में केन्द्रीय जीएसटी, प्रान्तीय जीएसटी में दो जगह व्यापारी को पंजीकरण करना पड़ेगा। दो जगह रिटर्न देना होगा। दो जगह कर निर्धारण कराना होगा। यह व्यवस्था अत्यधिक जटिल है। इससे कदम-कदम पर भ्रष्टाचार और उत्पीडऩ में इजाफा होगा। कनाडा और अस्ट्रेलिया की भांति इस व्यवस्था को एकपक्षीय किया जाएगा। एक पंजीकरण, एक रिटर्न और कर निर्धारण की व्यवस्था की जाए।

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