मोदी सरकार के दो साल - - देश की जनता हुई बदहाल , गंगेश्वर दत्त शर्मा !

केंदरीय कमेटी के आह्वान पर “बेलगाम महंगाई और बढ़ती बेरोज़गारी” के ख़िलाफ़ 11 से 17 जुलाई तक देश भर में चल रहे आंदोलन के तहत सी.पी.आई.(एम), दिल्ली राज्य कमेटी की ओर से आज जंतर मंतर पर एक धरने का आयोजन किया गया। बेलगाम महंगाई, खाद्य वस्तुओं की कालाबाज़ारी, सरकारी भर्तियों में लगा प्रतिबंध खत्म करो, सभी खाली पड़े पदों को तुरंत भरा जाए। अनुसूचित जाति-जनजाति के सभी खाली पड़े पदों को भरो तथा निजी क्षेत्र में आरक्षण मुहैया कराया जाए। मनरेगा की तर्ज पर शहरी क्षेत्र में रोजगार गांरटी कानून बनाए जाने आदि मांगों पर यह धरना दिया। राज्य सचिव के.एम. तिवारी सहित सचिवमण्डल सदस्य पी.एम.एस. ग्रेवाल, आशा शर्मा, सेहबा फ़ारूकी व राज्य कमेटी सदस्य रामपाल, प्रमोद सिंह, सिद्धेश्वर शुक्ला, जगदीश चंद शर्मा आदि ने धरने को संबोधित किया। वक्ताओं ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों के चलते आज देश की मेहनतकश जनता बेलगाम महंगाई, बेरोजगारी से बुरी तरह त्रस्त है। मोदी के वादों में से एक प्रमुख वादा यह था कि सरकार बनाने पर हर साल 2 करोड़ नौकरियां मुहैया कराई जाएंगी और बेरोज़गारों के लिए ‘अच्छे दिन‘ आने वाले हैं। मोदी के वादों ने पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को झूंठी उम्मीदें दिखाई। रोज़गार के नाम पर बस कांट्रेक्टर/ठेकेदारी प्रथा का बोलबाला है। राजनेता-ठेकेदार-अफसरों के गठजोड़ के तले आज नौजवानों के सपने दम तोड़ रहे हैं। जबकि मोदी सरकार द्वारा अपनाई गई नई नौकरियां न बनाने वाली व नौकरियां खाने वाली विकास की नीति के चलते आज देश में बेरोज़गारी बढ़ती जा रही है। वहीं मोदी सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि निजी क्षेत्र में आरक्षण देने की उसकि कोई योजना नहीं है। वक्ताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि नौकरियां हवा से नही आती हैं। मोदी सरकार की नीतियां रोज़गार मुहैया करा पाने में विफल रही हैं। इस मुसीबत से निकलने का रास्ता यही हो सकता है कि केंद्र सरकार निजी क्षेत्र के निवेश पर निर्भर रहने के बजाय, खुद अपना निवेश बढ़ाए जिससे नए रोज़गार बन सकें व अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। केन्द्र की मोदी सरकार के 2 साल के कार्यकाल के बाद बदला क्या है? आज मंहगाई सर चढ़ के बोल रही है। वहीं मोदी ने चुनावों से पहले महंगाई पर लगाम लगाने की बात की थी, आज वो जनता को इसे जूमला समझ भूल जाने को कह रही है। मोदी सरकार देश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़कर जनता का ध्यान महंगाई, बेरोज़गारी जैसी समस्याओं से हटा रही है।

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